यकीन हो गया
घड़ी का काटा अब पीछे जा नहीं सकता
मै कितना भी याद करूं उसको ,
कोई उसे मुझे लौटा नहीं सकता
मंजर हमेशा अस मंजस में डालते है,
उसने मुझे मना कर दिया है ये बात भी झुठला नहीं सकता
यकीन हो गया कि अब यकीन करना ही होगा
मै अब कितना भी गिड़गिड़ाऊ
अब रुक कर कोई फायदा नहीं,
आगे चलना ही होगा
जितना मैंने देखा और समझा था उसे
सौ प्रतिशत मुझे वैसा ही जीवनसाथी चाहिए था,
लेकिन उसकी खूबियों से प्यार करने से पहले,
मुझे उससे पूछ लेना चाहिए था,
सब की अपनी पसंद होती है, शायद मुझमें उतनी अच्छाई नहीं है,
बहुत देर हो गई अब ,
मुझे ये सब पहले सोच लेना चाहिए था
यकीन हो गया कि अब यकीन करना ही होगा,
मै अब कितना भी चीखु चिल्लाऊं,
सख्त हिदायत थी उसकी ,
अकेला था अकेले मरना ही होगा
अच्छी नौकरी , अच्छी तनखवाह ,
अच्छा परिवेश , अच्छी शौहरत ,
कुछ काम नहीं आया ,
वजह नहीं जानता ,
शायद दिल - ओ -दिमाग में हां सुनने के लिए आवाज छाई थी,
मेरी तैयारी पूरी थी पर
हां के साथ , नहीं सुनने का फैसला भी मुझे मन में बना लेना चाहिए था
यकीन हो गया कि अब यकीन करना ही होगा
कोई और तो नहीं पर अब मुझे खुद को सहारा देना होगा,
अब अफसोस करने का कोई फायदा नहीं,
जिसने ना कहा वो ना बोलकर जा चुका है,
अब मुझे भी मुड़ना होगा,
आगे चलना ही होगा
घड़ी का काटा अब पीछे जा नहीं सकता
मै कितना भी याद करूं उसको ,
कोई उसे मुझे लौटा नहीं सकता
मंजर हमेशा अस मंजस में डालते है,
उसने मुझे मना कर दिया है ये बात भी झुठला नहीं सकता
- गौतम पात्र
14/7/20
2:40 pm

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