कोई नहीं है

चलते चलते बाजार में उनका ही चेहरा दिखाई दिया
ध्यान से ढुढने से पहले , सबकुछ मिटा ही दिया,
घर के दरवाजे पर बैठे सोचते सोचते ,
वो आये आसुओ को चुप करा गए  ,
ध्यान से देखने से पहले वो चले गए  ,
वो ही तो थे वेहेम नहीं है
दोगले लोग कहते है
कोई नहीं है
सब्जियां काटी , कपडे सुखाये ,
हर काम में हाथ बटाते है ,
अपनी लिखी किताबे देर रात मेरे साथ पढने आते है ,
अकेले नही ,ना अकेले हम बडबडाते है
वो ही तो थे वेहेम नहीं है
दोगले लोग कहते है
कोई नहीं है
हर हस्पताल ने हाथ पीछे कर लिए जब ,
फिर आप लोगो ने उनका चिता जलाया था  ,
कहा था वो कह रहे है मै जिंदा हु ,
मेरा चीखना चिल्लाना किसी को समझ नहीं आया था ,
अब इसी बात की शिकायत वो करते है ,
वो ही तो थे वेहेम नहीं है
दोगले लोग कहते है
कोई नहीं है
   -  गौतम पात्र
Published on 7/16/20 4:15 PM

18/7/20 3:25 pm