मै खो गया बासुरी की धुन में 

एक जगह खड़े होकर तरंग निकालती  है उस बासुरी से ,
होठो पर रखकर , आहिस्ता आहिस्ता हिलते हुए  ,
प्यार का प्रसंग निकालती  है उस बासुरी से ,
तुम्हारे रूप रंग का एक अलग लहजा मिलता है उस बासुरी से ,
क्या हुनर है तुम्हारे पास , कितना अच्छा बजाती हो तुम ,
देखा तुम्हे तो 
मै खो गया बासुरी की धुन में 
तुम्हारी लगन साफ़ तुम्हारे चेहरे पर दिखाई देती है 
तुमसे होकर बासुरी, बासुरी  तुम्हारी परछाई देती है ,
काश दो पल की दोस्ती मुझसे भी उस बासुरी की तरह कर लेती ,
सोभ्ग्य होता मेरा क्युकी सच में तुम्हारी जैसी लड़की बहुत कम दिखाई देती है 
देखा तुम्हे तो  मै खो गया बासुरी की धुन में  मै तुम्हारा श्रोता जीवनभर रहूँगा , तुम्हारी बजाई धुनों से मै कई  परेशानियों को भूल जाता हु , यूं ही बासुरी बजाती  रहना , पेड़ पौधों और खासकर मुझे अच्छा लगता है , एक सुकून है तुम्हारी बासुरी की धुन में , जो किसी और खूबसूरती में नहीं होती  देखा तुम्हे तो  मै खो गया बासुरी की धुन में      - गौतम पात्र 2/8/20 4:08 am