तुमने तो बात करना छोड़ दिया 



बिस्तर पे लेटा हु आखें खुली है और तुम्हारी हलचल पलकों पे होती है ,
सुबह उठकर , मुह धोते वक्त ऐसा लगा जैसे पूरी रात की यादें होती है ,
नास्ता करने बैठता हु तो हर निवाले के साथ तुम दिखाई देती हो 
कोई भी काम करता हु , तुम एक गहरी सोच की तरह चलती रहती हो ,
तुम कूट कूट कर मेरे दिमाग में भर गयी हो ,
तुमने तो बात करना छोड़ दिया ,
लेकिन मेरे लिए मुश्किल कर गयी हो 
क्या तुम खुश हो , मुझे भूल गयी हो 
अब मेरा ध्यान नहीं आता ,
अब तुम्हे कोई फर्क नहीं पड़ता ,
फिर मुझे क्यों पड़ता है ,
मै भी तुमसे नाराज़ रहना चाहता हु ,
तुम अगर नहीं झुकोगी , मै कैसे कमजोर पड़ रहा हु ,
कोई भी काम करता हु , तुम एक गहरी सोच की तरह चलती रहती हो ,
तुम कूट कूट कर मेरे दिमाग में भर गयी हो ,
तुमने तो बात करना छोड़ दिया ,
लेकिन मेरे लिए मुश्किल कर गयी हो 
मैंने इतना क्या बुरा बोला जो तुम कभी वापस नहीं आई 
वो प्यार ही कैसा जहाँ  सुनी ना जा सके थोड़ी बुराई,
मेरी माफ़ी भी तुम्हे समझा ना सकी ,
मुझेसे नहीं हो रहा है  , कैसे तुममे इतनी हिम्मत आई 
कोई भी काम करता हु , तुम एक गहरी सोच की तरह चलती रहती हो ,
तुम कूट कूट कर मेरे दिमाग में भर गयी हो ,
तुमने तो बात करना छोड़ दिया ,
लेकिन मेरे लिए मुश्किल कर गयी हो 
            - गौतम पात्र 
f-3:28am 
11/8/20 3:29 am