तुम अलग अलग तस्वीरो में , अलग अलग चेहरा नज़र आती हों



किसी एक चेहरे में  तुम्हे पहचानना मुश्किल है ,
   कल कुछ और थी पर आज तुम्हारी खूबसूरती कुछ और है ,
   कही हसना , कही रोना , कही सवर कर खडी होना ,
    क्या कहु तुम्हे देखकर ऐसा लगता है
    जैसे रोज एक  नयी लड़की से मै प्यार कर रहा हु ,
    सच बताओ ये कौनसी कला तुम जानती हो 
तुम अलग अलग तस्वीरो में , अलग अलग चेहरा नज़र आती हों
   ये रंग रूप धोखा दे जाते है 
   डर लगता है कही मेरा प्यार गुम न हो जाए ,
   इतनी बारीकी से सजती हो ,
    की तुम्हारी सभी बुराइयाँ भी अच्छी लग जाए ,
     हम तो रोज एक से लगते है पर तुम कैसे  परिवर्तित होती हो 
सच बताओ ये कौनसी कला तुम जानती हो 
तुम अलग अलग तस्वीरो में , अलग अलग चेहरा नज़र आती हों
    नजरो का नजरिया नहीं ,
    तुम्हारी खूबसूरती में फर्क है ,
    कह भी दो , हम कहाँ ले जायेंगे तुम्हारी चेहेक ,
    ये चेहरे बदलना कहाँ से सिखा ,
     सच सच बताओ अगर तुम सच में मुझसे बात करना चाहती हो 
सच बताओ ये कौनसी कला तुम जानती हो 
तुम अलग अलग तस्वीरो में , अलग अलग चेहरा नज़र आती हों
- गौतम पात्र

24/7/20
2:45 am