अज़ल

एक वाहियात वारदात को कितना झुठलाओगे 
अज़ल से ही मक्कारी नज़र आती है 
इस वर्दी के दम पे क्या क्या छुपाओगे 
अज़ल से ही खून से सनी बेजारी नज़र आती है 
कभी इमानदारी से किसी केस की  निष्कर्ष पे गए भी हो 
अज़ल से ही इन बंदरो की कोई बड़ी मदारी नज़र आती है 
सबूत मिटा कर , कातिलो का पक्ष लेने वालो 
अज़ल से ही अन्याय करने में उपाधि नज़र आती है 
एक सुम सा दिखने वाला मासूम भयानक मौत मरता है 
अज़ल से ही बरगलाने की बीमारी नज़र आती है 
जनता इतनी बेवकूफ नहीं , ऊपर वाला सच का पैगाम दे ही देता है 
अज़ल से ही सबकुछ रफूचक्कर करने की तैयारी नज़र आती है 
क्या सोचा था ये  कुकर्म करके ,आसानी से मुक्त हो जाओगे 
अज़ल से ही खुले-आम  सीना चोरी नज़र आती है 
इतनी कठोर सजा होगी की अब कभी कोई गठन नहीं कर पाओगे 
अज़ल से ही ऐसे ही जल कर सब खाक नहीं हुआ , चिंगारी नज़र आती है 
                   - गौतम पात्र 
13/08/2020
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