अज़ाब
गवाह निरोधक हमले होते है अक्षर चश्मदीदो पर ,
कैदखानो पे लगे ताले भी खुलेआम अज़ाब दे जाते है
तस्दीक की पुष्टि नहीं हो सकती जान से फ़ारिग होने की शर्तो पर ,
धमकियों की सुपारी भी गहरा अज़ाब दे जाते है
कटघरे खरा नहीं उतर सकेंगी न्याय की उम्मीदों पर ,
दरिंदो के दुष्कर्म चाकू दिखाकर अज़ाब दे जाते है
खपत हो जायेंगे सभी साक्षी सुरक्षा के नतीजों पर ,
ये जघन्य दलाल खूंखार होने का अज़ाब दे जाते है
बड़ी लुट-पाट हो जाती है जुबानो की , सस्ते कौडियो पर ,
कितनी आसानी से ये पीडितो को और भी अज़ाब दे जाते है
निर्णयकर्ता कुछ सख्ती बरतो इन बातो पर ,
कई बार गलत फैसले भी निर्दोषी को जीवन भर के लिए अज़ाब दे जाते है
- गौतम पात्र
f - 2: 03 AM
17/08/2020 02:04

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