कोई ढूंढेगा
मेरी उदासियो का सबब क्या कभी कोई ढूंढेगा,
खाली पेट की खाली गूंज क्या कभी कोई ढूंढेगा,
मै अकेला हु इस तारीकी में ,
क्या इस तारीकी में आकर सहारा क्या कभी कोई सहारा ढूंढेगा,
तहकिर करके तो सभी ने दुत्कार दिया है ,
मेरी तकलीफों को लिखने के लिए , उसे हटाने का ओजार क्या कभी कोई ढूंढेगा,
कोई ढूंढेगा
किसी का दर्द देखकर किसी को भी दर्द नहीं पड़ता
मेरा बदन गल रहा है , जल रहा है ,
पर किसी को फर्क नहीं पड़ता ,
कुछ लोग हाथ में पैसे थमा देते है और कुछ कतराते है ,
क्या कभी कोई मेरे साथ मिलकर मेरा घर क्या कभी कोई ढूंढेगा ,
एक बीमारी ने माँ की ज़िन्दगी ज़ब्त की हुई है , क्या कभी कोई ढूंढेगा
मेरे बच्चे सडको में हर गाडियों से भीख मांगते है ,
क्या उनका भविष्य क्या कभी कोई ढूंढेगा,
कोई ढूंढेगा
वो भगवान् इतना दुराचार तो नहीं है ,
अपने एक बेटे को जीवन की सारी मूलभूत चीज़े दे और दुसरे बेटे को सड़क किनार कर दे ऐसा तो नही है ,
मै भी इंसान जैसा जीना चाहता हु
क्या इस तारीकी में आकर देखभाल क्या कभी कोई देखभाल ढूंढेगा,
तहकिर करके तो सभी ने दुत्कार दिया है ,
मेरी तकलीफों को लिखने के लिए , उसे हटाने का ओजार क्या कभी कोई ढूंढेगा
- गौतम पात्र
f - 3:55am
28/7/20 3:53 am

0 Comments