कयास

शाम की पनाहों में कुछ देर ठिठोलियाँ कर लेने से 
संगीन सोहबत नही बन जाते है .
यूँ छोटी मोटी मदद तो हर कोई कर देता है ,
ऐसी मदद से  मोहब्बत नहीं बन जाते  है ,
जिस कुर्सी में वो बैठकर चली गयी ,
तुम बार बार उसमे बैठकर कौनसी महक मालूम कर रहे हो 
जो कलम उसने फेक दिया है ,जो बिलकुल खाली  है ,
तुम बार बार रख लेते हो कौनसी महक मालूम कर रहे हो 
कितनी बार तुमने गणित के सवाल पूछे और वो हर बार लिख कर देती है ,
उसका लिखा सिने से लगा कर कौनसी महक मालूम कर रहे हो 
तुम्हारा ये कयास लगाना उसे कुछ साबित नही करता है ,
ऐसे कयासों से कोई किसी का आश्ना नहीं बन जाते है 
कुछ निजी गम  बाट दिए होंगे उसने बातो बातो में ,
लेकिन इससे संगम नहीं हो जाते है ,
यूँ प्यार से बात तो हर कोई कर देता है ,
इन प्यारी बातो से कुर्बत नहीं हो जाते है 
तुम्हारा ये कयास लगाना उसे कुछ साबित नही करता है , ऐसे कयासों से कोई किसी का आश्ना नहीं बन जाते है 
      - गौतम पात्र
28/7/20 2:47 am
f- 2:51am