शिगाफ़ 

गुंजाइश नहीं , सभी शक का बचाव करने लगे 
इलज़ाम-ए- समर्थन पर विश्वास करने लगे  ,
सभी सवाल-जवाब करने लगे ,
मंगेतर ने मगनी तोड़ दी ,
जब सभी मेरे खिलाफ कहने लगे ,
कितना झूठा वो पंडित  था 
जो कहता  था सुखी दांपत्य होंगे ,
मकबूल कैसे हो ऐसी शिर्कते,
जब साथी  ही साथ नहीं होता ,
अगर भरोसा रखती तो कभी शिगाफ नहीं होता 
शुक्र है तुम्हारे दो चेहरे भी सामने आ गए ,
वरना तुम्हारी मुस्कुराहट पे मुस्कुराते हुए हम तो धोखा खा गए ,
भविष्य अपना तुम्हारे साथ देख रहे थे ,
कितना मानते  थे हम तुम्हे लेकिन तुम तो हमे गलत ठेहरा गए ,
लोगो ने कुछ उंगलिया क्या उठाई , 
तुमने तो हमारा पूरा हाथ छुड़ा लिया  ,
चलो तर्क करते करते  ,तुम बच गई  मुझसे शादी करते करते  ,
पर तुम्हे अँधेरे देकर मुझे कुछ लाभ नहीं होता ,
मकबूल कैसे हो ऐसी शिर्कते, जब साथी  ही साथ नहीं होता , अगर भरोसा रखती तो कभी शिगाफ नहीं होता 
तुम्हारे लिए तो कई नए आशियाने खरीद लिए थे ,
जब मालूम हुआ की  अपनी ज़िन्दगी मेरे साथ आरक्षित कर रही हो 
मैंने खुशी ख़ुशी में कितने  पर्यटन स्थल ढूंड लिए थे ,
जब सारी बाते हो गई तो दुसरो की शिकायत सुनने लगी हो ,
मेरी मोहब्बत तुम्हारे मुकाबिल नहीं है ,
अगर होता तो ये रिश्ता कभी आ घात नहीं होता 
मकबूल कैसे हो ऐसी शिर्कते, जब साथी  ही साथ नहीं होता , अगर भरोसा रखती तो कभी शिगाफ नहीं होता 
               - गौतम पात्र 
24/07/2020
13:14