रक़म

कूड़े करकट में पड़ी झूठी रोटी भी 
भुख डेड गुना कम कर देती है ,
हाथ फ़ैलाने वाले बटुआ नहीं गिनते ,
गिनने वाले तो कचरे से भी आय कर लेते है ,
वास्तिवकता है की अब हर सामान का दर निर्धारित है ,
मोहब्बत है तुमसे पर खाली  नहीं बैठे रहते है ,
मै भी तुम्हारे कुछ काम आऊंगा ,
इस विषय में भी अब विश्वास पक्का कर लेते है 
चलो इस मौहबत के लिए एक रकम रख लेते  है
चलो इस मोहबत के लिए अपनी पराक्रम रख देते है 
इन्सान अगर जारक से तो पेड़ भी CARBONDIOXIDE से ,
ये लेने देने की प्रकिया तो सदियों पुरानी है ,
शिखर पर चाँद है पर रात होने पर ही सिर्फ ,
क्युकी दिन में तो सूरज का साम्राज्य है ,
वास्तिवकता है की अब हर वस्तु का हुनर  निर्धारित है , मोहब्बत है तुमसे पर खाली  नहीं बैठे रहते है , मै भी तुम्हारे कुछ काम आऊंगा , इस विषय में भी अब विश्वास पक्का कर लेते है 
चलो इस मौहबत के लिए एक रकम रख लेते  है चलो इस मोहबत के लिए अपनी पराक्रम रख देते है 
रकम तुम्हे खुश रखने की ,
रकम तुम्हे संतुष्ट रखने की ,
क्या काबिल होगी मेरी दौलत ,
रकम तुम्हे आज़ाद रखने की ,
रकम तुम्हारी चिंता और चाहत की ,
रकम तुम्हे वक्त  देने की ,
रकम एक अच्छे इन्सान बन्ने की ,
रकम तुम्हारे लिए वरदान बन्ने की ,
इस रकम को कम ज्यादा नहीं किया जा सकता ,
क्युकी ये रकम  मेरी मोहब्बत की दी हुई है ,
वास्तिवकता है की अब हर सामान का दर निर्धारित है , मोहब्बत है तुमसे पर खाली  नहीं बैठे रहते है , मै भी तुम्हारे कुछ काम आऊंगा , इस विषय में भी अब विश्वास पक्का कर लेते है 
चलो इस मौहबत के लिए  रकम आधा आधा कर लेते  है चलो इस मोहबत के लिए अपनी पराक्रम रख देते है 
                - गौतम पात्र

24/07/2020
01:49