इफ़लास



बदन की गरिमा वसन ,
वसन से आती सुरभि ,
गुजरी  मुस्कुराकर आखे ,
कई इरादे यतीम हो गए ,
इकलौती  खुराक-ए-इश्क  है ,
साथी का विलोम अंतिम हो गए ,
इश्क में इफ़लास होना भी मंज़ूर है 
मगर इश्क मिले तो सही 
इश्क में सभी  ज़ियाँ भी मंजूर है
मगर इश्क मिले तो सही
कमनीय चहरे के सिवाय ,
नाम भी तो मालूम हो जाए ,
उम्र भर वकालत करेंगे पर ,
रिश्ता कौन लेकर जाए ,
इश्क के उपरांत और इश्क के बजाए,
वाकफियत कौन करवाए ,
इश्क में इफ़लास होना भी मंज़ूर है  मगर इश्क मिले तो सही  इश्क में सभी  ज़ियाँ भी मंजूर है मगर इश्क मिले तो सही
गैर की जुबान पे सवाल तो होंगे ही ,
जवाब में होशियारी कैसे करें ,
हाथ भी मिल जाए और ज़र्रा-नवाज़ी भी हो ,
पहले से वो तेयारी कैसे करें ,
आसान था उल्फत कर लेना पर अधिकारी कैसे बने 
इश्क में इफ़लास होना भी मंज़ूर है  मगर इश्क मिले तो सही  इश्क में सभी  ज़ियाँ भी मंजूर है मगर इश्क मिले तो सही
       - गौतम पात्र 

23/07/2020
03:05