आमादा
चाव से किये हुए काम में अब तक दाद नहीं मिली
इत्तिला तो करो कोई की सुनकर स्वाद नहीं मिली
मुनफ़रिद ही रहूँगा क्या इस मुशायरी में ,
दूर दूर तक देखा तो सुनने वालो की तादाद नहीं मिली
हर नए दिनाक के साथ एक नयी रचना की रिहाई होती है ,
नदारद कहा है सभी , निचे लिखी कोई संवाद नहीं मिली
भरते जा रहे है पन्ने परन्तु बज्म अब तक खाली है
मो'तबर मुन्सिफो की और से कोई जवाब नहीं मिली
श्रोतागण की अदद दुसरो के पास है काफी ज्यादा
साल भर मेहनत करके देख लेते है , कई या कोई तो जुड़ने के लिए होगा ही आमादा
तवातुर प्रयास रखना होगा जारी ,
जिद्द-ओ-जहद से भी मुसालहत नहीं कर सकते ,
आजिज़ के बिना किसी को भी एजाज़ नहीं मिली
- गौतम पात्र
09/08/2020
04:18

0 Comments