अजनबियों से इश्क़ करना हमारे ही पूर्वजों की परंपरा है


आशंका मत जताओ ये बात सच है
इस बात पे तोह खूब होते खर्च है
जब दामाद चाहिए हीरे जैसा
तोह सर आंखों पर उसकी हर शर्त है

लड़कियां को खूब शिक्षा दी जाती है रिश्तों की ,
कैसे खातिर की जाती है फरिश्तों की ,
बेचारी लड़कियां करे भी तो क्या ,

लड़का होना चाहिए होनहार
सरकारी दफ्तर हो या करता हो व्यापार ,
अपनी लड़की को खुश रखे बस हो धनवान
दो बाते पूछी उस अजनबी से और कर देते है रिश्ता तय ,
जैसे इस नौकरी के बाद तोह खुशियों का bonus दोगुना होगा और incentive भी मिलेगा,

अजनबियों से इश्क़ करना हमारे ही पूर्वजों की परंपरा है

लड़कियो की ज़बान तोह वैसे भी बंद रहती है
शादी की बात सुन कर वो भी उछल पड़ती है
इसलिए क्युकी अपने तोह सिर्फ दरवाजा ही दिखाया करते थे घर का ,
चलो कोई अजनबी ही सही लेकिन दिखाएगा वो मुझे आसमान नीले घर का,

अजनबियों से इश्क़ करना हमारे ही पूर्वजों की परंपरा है

आगे की पीढ़ी भी ऐसे ही चलती रहती है
ये सोचकर की चलो कोई तोह है जो अपना खयाल रख रहा है
लेकिन अजनबी सिर्फ वही हो जो परिवार वालो की देख रेख में है ,
किसी और अजनबी से इश्क़ लड़ाने की इजाज़त नहीं है ,
क्युकी लड़कियो को लगता है मा बाबा ने मेरे लिए जो सोचा है अच्छा ही होगा,
क्युकी रोटी खाने के लिए गेहू तोह खरीदना पड़ता है ,
और इसलिए अजनबियों की औकात भी देखी जाती है,
खुद अगर पेड़ चढ़ना जानती तोह फल खुद तोड़ सकती थी लेकिन वो ऐसा करने की हिम्मत नहीं रखती इसलिए

अजनबियों से इश्क़ करना हमारे ही पूर्वजों की परंपरा है ।

अजनबियों से इश्क़ करना हमारे ही पूर्वजों की परंपरा है ।

© gautam patra
27 MAR 2020 AT 1:43