तुम्हारी बातो का खत लेकर आया था एक बेजुबान कागज



तुम्हारी बातो का खत लेकर आया था एक बेजुबान कागज

मेरे हालातो का जायजा लेने आया था ,
कुछ सवाल शिनाख्त करते है मेरे गहरे ज़ख्म का ,
लेकिन कैसे उभरा मै अपनी तबीयत में ,
कुछ ऐसे ही ज़िक्र आया था काफी दूर से ,


तुम्हारी बातो का खत लेकर आया था एक बेजुबान कागज

कितना आसान था दिल के किवाड़ को तोड़कर ,
मुझे अकेला छोड़कर ,पलायन कर जाना ,
दुख तो यह है कि तुम आज भी मुझसे इश्क़ फरमाती हो ,
लेकिन सिर्फ अपने काम के सिल सिले में दूर रहकर ,
मेरी आरजूओं की चिंता ना करे ,अपनी ज़िन्दगी में आगे बढ़ते जाइए,
कुछ ऐसा ही प्रस्ताव काफी दूर से आया था ,


तुम्हारी बातो का खत लेकर आया था एक बेजुबान कागज

सुन कर उस खत को मेरी तकलीफे एक पल को मेरे विरोध में हो गई ,
शक जाने लगा अपनी ही भावनाओ पे ,
लेकिन फिर मालूम हुए की ये अवशेष है उन्हीं की याद के ,
खिलाफ क्या कहे ,खिलाफ क्या लिखे ,
जवाब में खाली कागज भेजना उचित होगा,
शायद अगली बार कुछ आवाज भी भेज दी जाए चिठ्ठी में,

तुम्हारी बातो का खत लेकर आया था एक बेजुबान कागज

© gautam patra
28 MAR 2020 AT 6:26