जमीनी हकीकत



जो अर्जी दिल ने लगाई थी
जो खत हमने भेजे थे
जो सबूत हमने दिए थे
जो बहस चली थी उसके मेरे बीच
जो बातो की तह तक ना जा सकी

वो जमीनी हकीकत से दूर हो गई
उस लगा हम उसे जीने नहीं देंगे
लेकिन हम तोह उसके इश्क़ में धर्म तक बदल दे अपना ,
लेकिन उसकी गलत फहमी के शिकार हुए है हम

ऐसा क्यों था कि हम उसे जीवन संगिनी बनाना चाहते थे और वो हमे रण भूमि में पछाड़ना चाहती थी,
ऐसा क्यों था कि वो हमे मारकर जश्न करना चाहती थी और हम उन्हें उपहार देकर मुबारक की मुस्कान देना चाहते थे,
क्या एक प्रेम में इतना भी विश्वास नहीं की विवाद होने पर एक दूसरे को समझ जाए


जमीनी हकीकत यही है
की

वो जमीनी हकीकत से दूर हो गई
उस लगा हम उसे जीने नहीं देंगे
लेकिन हम तोह उसके इश्क़ में धर्म तक बदल दे अपना ,
लेकिन उसकी गलत फहमी के शिकार हुए है हम

© gautam patra
27 MAR 2020 AT 0:49