कसर

मालिको का साहचर्य बनना भी कितना मुश्किल है 
आदिल होने पर  भी कसर का इलज़ाम रोज सहना पड़ता है 
गलतियों को अनिवार्य  करना भी कितना मुश्किल है 
शामिल न होने पर भी कसर का इलज़ाम रोज सहना पड़ता है 
रात दिन दफ्तर में काम करना भी कितना मुश्किल है 
एक दिन अधुरा रहने पर भी कसर का इलज़ाम रोज सहना पड़ता है 
शाबाशी के लिए सही सही करना भी कितना मुश्किल है 
तबियत की कीमत पर भी कसर का इलज़ाम रोज सहना पड़ता है
तन्खा वक्त पर देना भी कितना मुश्किल है 
कोशिश करने पर भी कसर का इलज़ाम रोज सहना पड़ता है
काम करे हम लेकिन काजी बनना भी कितना मुश्किल है 
हाथ जोड़ने पर भी कसर का इलज़ाम रोज सहना पड़ता है
छोटी छोटी अबस गलतियों का लेखा जोखा रखना कितना मुश्किल है 
गुलाम बन्ने पर भी कसर का इलज़ाम रोज सहना पड़ता है
- गौतम पात्र

25/07/2020
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