इज़्तिराब

एक छोटे से निवास में कई उम्र पुरे हो जाते है ,
पिता और पुत्र फिर भी एकसूत्र नहीं हो पाते है 
साक्षी है रंजिशे , जो अमूमन बरामद करती है  इज़्तिराब दोनों के बिच ,
विवाद हो जाते है पर सहमत कभी नहीं  हो पाते है
 एक बुरे लक्षण पर अनेको  कटाक्ष करने पर मुठभेड़ हो जाते है 
पिता पिता नहीं और पुत्र पुत्र नहीं रह जाते है 
साक्षी है ईशाद , जो अमूमन बरामद करती है  इज़्तिराब दोनों के बिच
बैठकर अब नहीं होती बाते , सीधे आयुध चलाते  है 
जायदाद ने जनाज़ा बनाया , तकाजा ने मुजरिम बनाया 
पढने में आती है अनेको वारदात  समाचार पत्रों में ,
पुत्र ने पिता का ,पिता ने पुत्र का खून बहाया,
साक्षी है तैश ,ऐसे मामलो में नहीं हो सकता इस्तीफा दोनों के बिच ,
साक्षी है ईशाद , जो अमूमन बरामद करती है  इज़्तिराब दोनों के बिच
क्या युग आया है सही  गलत का फैसला अब संगीन अपराध से हो जाते है              - गौतम पात्र  01/08/2020
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