तूलिका
साफ़ कागज़ पर शब्द सवारना अत्यंत कठिन होता ,
तूलिका और पत्रांजन अगर आधुनिकता से विहीन होता ,
देखा जाए तो कागज़ ने भी अपने बदन खूब बदले है सदियों से ,
नहीं तो साफ़ सुथरे शब्दों में लिखना अधिकतर के लिए मुहीम होता
शाखामृग मानव संवाद का साधन विकसित करने लगा ,
आवाज और चित्रों के प्रयोगो से अपने संकेत भेजने लगा ,
वह अपने बनाये हुए आकृतियों को देखकर अचंभित होने लगा ,
जब उसे इन सब से सहूलित हुई तो वो और ज्यादा चीज़े देखने लगा ,
पत्थर की धार से चट्टानों में आकृति बनाने वाला मनुष्य ,
मोर पंख , सरकंडा , जैसे विकसित तूलिका उपयोग करने लगा ,
तालपत्र , ताम्रपत्र ,शिलालेख और लकड़ी जैसे कागज़ ही हो ,
कलम-दवात भी खूब प्रचलन में उपयोग होने लगा
आराम से लिखने की इच्छा में तूलिका और आधुनिक होते गए,
पहले फाउंटेन पेन के आविष्कार के बाद ballpoint pen,rollerball pen , felt-tip pen , gel pen , stylus pen जैसे तूलिकायें बन रहे है
भविष्य में भी तूलिका की नयी पीड़ियाँ आती रहेंगी क्युकी नयी तकनीको को विकसित करना मनुष्य का स्वाभाव है
- गौतम पात्र
04/08/2020
06:05

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