मुरव्वत


कुछ धुप निकल रही है अगर पिंजरों से सही सलामत आने दो
नाजायज़ तो तकलीफे होती है , कदर करो, मुरव्वत आने दो

जिस्म से पोशाक उतरे की बाज़ार बन गए ,
जीस्त जो कोख से निकले ,मदद करो ,शक नहीं, सहमत आने दो

दरवाजे पर रुके रहे और बिस्तरों से खर्च उठा लिया ,
नन्हा शिक्षा लेने आया,शिक्षा दो , उसकी हिम्मत आने दो

रात के अँधेरे बहुत भारी होते है लेकिन इल्जामो से हालात ठीक नहीं होते ,
नाज़ुक उम्र चरित्रहीन कैसे हो गए , बराबर का बचपन दो , परछाई पे मरम्मत आने दो

लाचार थी उसकी ज़रूरते , हसने वाले घिनौना बोलकर चले गए ,
जब पैर निकल रहे है इज्ज़तदार और बड़ी मंजिलो के रास्तों पर , शाबाशी दो , हसरत आने दो

थूक थूक कर थूक दिया हर तरफ से उनको ,
अब अपनी मर्ज़ी से मिसाल बन रहे है , अब तो बरकत आने दो

माँ ने जो किया, सो किया लेकिन हर कमाई कुर्बान दिया था ,
वैसी ही सारी उसकी नस्ल होगी , अपमान मत करो , आगे आने दो

नियम कायदे कोई अपने ज़मीर के किराये पर नहीं रखता ,
ए समाज दर्शक ना हो , उठायो ज़रा कुछ गरीबी या सहयोग की फितरत आने दो



- गौतम पात्र

S- ‏‎00:36:38

f- 1 : 48 am

26/08/2020
01:55