अलर्रग़्म
ज़िन्दगी टूटे हुए किस्से तू सुना अलर्रग़्म जितना भी हो बुरा
ज़िन्दगी अपनी परछाई बाहर दिखा अलर्रग़्म जितना भी हो जला
कुछ गलतियाँ ज़ख्मो पे नमक ही मरहम है अलर्रग़्म जितना भी हो दर्द
ज़िन्दगी हस्ते खेलते चेहरे दिखा अलर्रग़्म जितना भी रोया
तेरे आस पास कौन देख रहा था अलर्रग़्म जितना थी अकेली
तेरी थकावट भी तेरा शराब ले गयी अलर्रग़्म जितना भी उलटी हुई
पक्के दिलो से रिश्ता रख लेना अलर्रग़्म जितना भी हो सहना
कुछ रिश्तें अगर उम्र के साथ सुधर जाए अलर्रग़्म देख लेना
जिम्मेदारियां मिलती रही , हाथ खाली कहाँ रहे अलर्रग़्म जितना भी हो प्यार कर लेना
बाहर भी काम करुँगी , इतनी ज़बान करुँगी अलर्रग़्म सब मेरा ही है ना
जबसे उपनाम बदला , ज़िन्दगी तेरा दाम बदला अलर्रग़्म जितना हो गया अब अगला
आसमान साफ़ करते करते भी रातें जायेंगी नहीं अलर्रग़्म जितना हो गया रंगला
ज़िन्दगी हर बात अपनी सुन अलर्रग़्म जितना भी हो सुनना
ज़िन्दगी मकसद तेरा ना मिल पाए तो अलर्रग़्म जितना भी हो करना
- गौतम पात्र
S- 2: 53AM
F- 3: 29 AM
31/08/2020
03:30

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