अय्यार
पेशानी अपनी हलक से बार बार गलत मंजूरी के लिए छेड़ती है
जिस्म में टंगे एक नशीले पदार्थ के सेवन के लिए अय्यारी करती है
सर्च बार से नंगे हुस्न की तस्करी आखो तक मुहैया हो जाती है ,
लटके हुए जर से बल के जोरो पे गुदगुदी निकालने के लिए अय्यारी करती है
देखकर उत्तेज़ना ,रूह में एक नौजवान पशु हावी होता है जिस्म पे ,
नोच कर खा लेता है सब मौज , दोबारा करने के लिए अय्यारी करती है
आखे छोटी , गाल दुबले , जिस्म में बुढ़ापा दिखाई देता है ,
काबू हो जाता है कुछ देर , कुछ देर में खून चूसने के लिए अय्यारी करती है
भारी संख्या में अश्लील देखने से जीवन शैली में हवस उतर आता है
नहीं मानोगे तो भी चुस्कियां देगा नशा की बहलाने फुसलाने के लिए अय्यारी करती है
खूबसूरती कहाँ बचेगी अगर मैल बर्बाद कर देंगी माश्पेशियाँ ,
रोक लो खुद को , मत करो , मजा मजा नहीं है जो भी ये मज़े के लिए अय्यारी करती है
- गौतम पात्र
S- 00:58AM
F- 2:27AM

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