बख़्त

अभी आखे थिरक रही है , अन्दर तक दिल के ज़िन्दगी है ,
हर क्षण मौत लटक रही है , अंदाजा नहीं है ,
एक झटके में कल हो जाती है काया ,
बख्त जितना भी अच्छा हो ,काल आये तो बताती नहीं है 
अभी यही इमारत गिर जाए तो  कितनी बदसूरत रातें हो जाए 
चैन की सांसें लेते लेते , क्या पता मौत बिच में आ  जाए ,
अच्छी हवा मिलते मिलते ,कभी पंखा गले को काट के चले जाए ,
दिल का दौरा भी पड़ सकता है , जानता है कोई मौत कब आ जाये 
एक झटके में कल हो जाती है काया , बख्त जितना भी अच्छा हो ,काल आये तो बताती नहीं है  दूकान 5रूपए लेकर गए और अगवा करने वाले 5 लाख मांग ले , मौत पर कड़ी नज़र रखना यहाँ उम्र से पहले भी कई क़त्ल हो जाते है , दवाईयां खराबियां इतनी दूर करती है की  खून में हवा खाली हो जाती है , कन्धा देने लग जाए कुछ मंडली और सब बाते पुरानी हो जाती है 
एक झटके में कल हो जाती है काया , बख्त जितना भी अच्छा हो ,काल आये तो बताती नहीं है  हर एक बूंद वक्त का बहुत जल्दी जल्दी  पुराना होकर दूर चला जाता है  अस्तित्व में क्या है , दो गाड़ियाँ टकराई और बेजान होकर सब दूर चला जाता है , हम है अभी , हम नहीं भी है ,हमारा होना क्या है , हमारा नहीं होना क्या है  हम कहाँ से आये है और किधर चले जाते है , जान का सृजन तो जान गए पर मौत के बाद क्या है ये कौन जानता है  एक झटके में कल हो जाती है काया , बख्त जितना भी अच्छा हो ,काल आये तो बताती नहीं है   एक किरदार जो चीखा , हँसा , रोया , बोला , दुःख ,सुख ,नाच ,गान गायब हो जाना , वो था भी कभी इस दुनिया में , भरोसा नहीं होता , कभी नहीं मिलते , ज़िन्दगी है अभी और अभी खून खराबा हो जाना , इतिहास हो जाते है नाम , एक नाम ही है जो मौत के बाद भी नहीं माना , एक झटके में कल हो जाती है काया , बख्त जितना भी अच्छा हो ,काल आये तो बताती नहीं है                                                        - गौतम पात्र  S- 12: 48AM F- 1:59AM

31/08/2020
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