मै मुश्किल में हु


कमियों की खामी ,
मेरी नाकामी ,
दिन ब दिन दर्द है ,
हो गया यही हावी 

मै मुश्किल में हु ,
मेरा दर्द ज़रा चहकता है 

आसानियत ना ली ,
पाने को ख्वाइश ,
मुश्किल अपना ली ,
क़र्ज़ में डूबा हु ,
बाहर कैसे जाया जाए 

मै मुश्किल में हु ,
मेरा दर्द ज़रा चहकता है 

अंजाम देना है मंजिल को ,
एक नाम देना काम को ,
किस्से मिलु ,बातें करूँ ,
धुप ,थकावट और क्या है 


मै मुश्किल में हु ,
मेरा दर्द ज़रा चहकता है 

©गौतम पात्र

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Written on year 2018 May/June in between