अंगड़ाइयां
ये अंगड़ाइयां आधा काम अधुरा रखने का बहाना लेती है
इतने थके भी नहीं है की इनकी सुनी ली जाये
ये अंगड़ाइयां उबासी के नाम पर रहने दो कहती है
हमारी फ़िक्र इतनी क्यों , क्यों न इसकी खबर ली जाए
कल शाम की बात है ये अंगड़ाइयां घुमने के लिए बोलती है
ये सपने क्या पेड़ में उगते है जो कही भी रख दी जाए
दोनों हाथो को जोर से फैला कर कसना और अंगड़ाई का जोर जोर से हसना ,
ऐसी आराम हज़म नहीं होती , झपकियो को हटा दिया जाए
चैन की नींद आये तभी तो आखें भरी हुई नींदों को नहीं लेते
रोजाना 8 घंटे से बेहतर है पुरे जीवन के लिए चैन ले लिया जाए
- गौतम पात्र
12/08/2020
01:00

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