उसने ऐसा क्यों कहा होगा
ज़िन्दगी ज़रा धीरे चल
ज़िन्दगी ज़रा संभल संभल,
कौन मिलता है एक दिन
ज़िन्दगी इस तरह बहक बहक
नहीं,
अजनबी सी है ये कोमल की महक,
उसने ऐसा क्यों कहा होगा,
तुम ही मेरे अधिकार हो
वक्त का क्या स्वार्थ है,
अर्थ क्या है इस खुशी का,
कोई आये हाथ थाम ले,
मेरे जीवन का पर्यायवाची खुद को मान ले,
उसने ऐसा क्यों कहा होगा,
तुम ही मेरा अधिकार हो,
उसके आसुओ को मै झुटला नहीं पाउँगा,
उस चेहरे में कुछ गहराई है,
मै क्या करूँ,
उसे गले लगा लू या बेदखल कर दू,
अपनी ही परछाई से पूछताछ क्या करूँ,
उसने ऐसा क्यों कहा होगा,
तुम ही मेरा अधिकार हो
© gautam patra
17 MAY 2019 AT 20:49

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