फ़िरदौस
मुश्तरी हो गए मनमोहक फ़िरदौस में आकर
खुशबुए कहा तक जाएँगी , हमे तो सभी फूल चाहिए
मालूम है सिर्फ देख सकते है यहाँ आकर ,
किसी और का है तो क्या , हमे तो केवल यही गुल चाहिए
सिर्फ देखकर कैसे उठा ले जायेंगे हम महक इनकी ,
हर्ज़ नहीं कीमत का , सिर्फ मालिक की मकबूल चाहिए
ये दस्तियाब है इर्द-गिर्द तो दवा सा स्वस्थ रखती है ,
ये बताओ कैसे ख़रीदे इनको , ना देना हमे , ना हमे कोई जुल चाहिए
ये बहिश्तों से भेजे उपहार लगते है , आम फूलो से कोई तुलना ही नहीं
कौन है इसका बाग़वान , कुल के गमलो में ऐसे मृदुल चाहिए
दरख़ास्त है इन्हें बेच दें हमे , आपकी खिदमत हुजुर होगी
गैर क़ानूनी का अडंगा ना डालिए , हमे ये मूल चाहिए ही चाहिए
- गौतम पात्र
s- 02:20 am
f - 2 : 21 am
20/08/2020

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