कोई पूछने नहीं आया
कई दिन हो गए आखो से दो बुँदे नहीं मिटी,
एक ग्लास पानी का हाल भी कोई पूछने नहीं आया
हर सुबह नयी तारीख हो जाती है और कुछ नहीं बदलता,
एक खास ज़ियान का हाल भी कोई पूछने नहीं आया
एक खुमार जो खंगाल लेती है खलिश ,उसकी दुर्गन्ध जाती नहीं ,
एक उदास पे बयान का हाल भी कोई पूछने नहीं आया
तराशते कैसे है तपिश को की हुलिया वक्त का ठीक ठाक दिखाई दे ,
एक उपवास तमाम नहीं रखते इसलिए कोई पूछने नहीं आया
काफी देर यश की धुप में खड़े हो गए थे इसलिए अब इतना अँधेरा है
एक दरस के तावान नहीं रखते इसलिए कोई पूछने नहीं आया
- गौतम पात्र
07/08/2020
04:03

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